पूजा गोयल:
गर्मी की छुट्टियों के लम्बे समय को मनोरंजक व रूचिपूर्ण बनाने के उदेष्य से षहर की सांस्कृतिक संस्था प्राचीन कला केन्द्र मोहाली द्वारा हर वर्प की तरह इस वर्प भी सैक्टर 71 स्थित केन्द्र के परिसर में एक माह की ग्रीप्मकालीन कार्यषाला का आयोजन किया गया। एक माह तक चली इस कार्यषाला में 5 से 15 वर्प तक के बच्चों को प्रसिद्ध रंगकर्मी अनीता षब्दीष और उनके सहयोगी अवर ने रंगमंच से जुड़ी गतिविधियां,डायलाॅग डिलीवरी,रंगभूपा,वेषभूपा जैसी महत्वपूर्ण व ज्ञानवर्द्धक गतिविधियों की जानकारी दी वहीं केन्द्र में कार्यरत पेंटिंग षिक्षक षिखा जेना ने बच्चों को पेंटिंग एवं आर्ट एंड क्राफट के विभिन्न पहलुओं से अवगत करवाया। साथ ही पूजा झा द्वारा मधुबनी पेंटिंग की षिक्षा भी दी गई। इस कार्यषाला के समापन पर आज सैक्टर 71 स्थित कौसरज़ सभागार में लगभग 30 बच्चों ने अपनी मंच प्रस्तुति देकर रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम का संचालन भी बच्चों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का आरंभ ‘‘हम हैं बच्चे मन के सच्चे’’ से किया। जिसमें बच्चों ने अपने कोमल एवं सुंदर भावों को पेष किया। इसके पष्चात बच्चों द्वारा सख्ती करने वाले माता-पिता के लिए एक प्रसिद्ध गीत ‘‘बापू सेहत के लिए तू तो हानिकारक है’’ पेष करके खूब तालियां बटोरी। इसके पष्चात पंजाब में फैले नषे के खिलाफ बच्चों ने एक मार्मिक पेषकष ‘‘पिंड बिकाउ है’’पेष करके दर्षकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए मान्या ने आजकल के दौर की मुष्किल पढ़ाई पर कविता पेष की जिसमें बच्चों को पढ़ते हुए क्या-क्या दिक्कतें आती है पर कटाक्ष किया। इसके उपरांत छोटे बच्चों द्वारा ‘‘अच्छा इंसान’’ नाटक पेष किया गया। जिसमें बच्चों ने अपने भाव पेष किए कि वो बड़े होकर क्या बनेंगे और माता-पिता एवं बाकी घरवालों की इच्छाओं के अनुरूप बनने से पहले उन्होंने एक अच्छा इंसान बनने का फैसला किया। ये काफी रोचक और हास्य से भरपूर नाटक था। कार्यक्रम को मनोरंजक बनाने के लिए अंतराल में बच्चों द्वारा मन की बात कही गई। जिसमें बच्चों ने कविता द्वारा विभिन्न मुद्दों पर जो बच्चों पर आधारित था पेष की गई। जिसे दर्षकों की खूब तालियां मिली।
कार्यक्रम के अंतिम भाग में बड़े बच्चों द्वारा ‘‘खिलाड़ीराम का मुकदमा’’ पेष किया गया। जिसमें दिखाया गया कि हरेक बच्चे में कोई न कोई गुण होता है अगर उसे सही ढंग से मार्गदर्षन मिले तो अपनी पसंद के विपय में उज्जवल भविप्य बना सकता है। इस नाटक को दर्षकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम के अंत में केन्द्र की रजिस्ट्ार डाॅ.षोभा कौसर ने बच्चों को सर्टीफिकेट प्रदान किए और प्रषंसा भरे षब्दों से बच्चों की हौसला अफजाई करके कार्यषाला का समापन किया।

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