Pooja Goyal

पंचकूला, 2 अप्रैल, 2019:

महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर (एमआईएमसी), लेह के संस्थापक अध्यक्ष, भिक्खु संघसेना ने आज यहां सेव दि हिमालयाज फाउंडेशन (एसएचएफ) के चंडीगढ़ चैप्टर की औपचारिक घोषणा की। संघसेना ने हिमालयी क्षेत्र की भूमि, प्रकृति, निवासियों, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा व संरक्षण के उद्देश्य से 2016 में एसएचएफ की स्थापना की थी। इसका फोकस जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के पिघलने, ऊर्जा के स्वच्छ व नवीकरणीय स्रोतों के विकास और जिम्मेदार, टिकाऊ व पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने पर है। नई दिल्ली व लेह के अलावा इसके अन्य केंद्र माउंट आबू, नेपाल, आस्ट्रेलिया, यूरोप व अमेरिका में स्थापित करने की योजना है। गत वर्ष लेह में पर्यावरण पर एक बड़ा सम्मेलन हुआ था।

दून पब्लिक स्कूल में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए, भिक्खु संघसेना ने कहा, ‘मुझे हिमालय के प्रवेश द्वार चंडीगढ़ में, एसएचएफ चैप्टर की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। यह पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में आवश्यक जानकारियां प्रसारित करेगा और समर्थन जुटाएगा। वरिष्ठ पत्रकार नरविजय यादव एवं डॉ. वंदना शुक्ला चंडीगढ़ चैप्टर के सलाहकार हैं। जलवायु परिवर्तन के लिहाज से हिमालय विश्व के सबसे संवेदनशील स्थानों में से एक है, जिसका असर ग्लेशियरों के पिघलने, अनियमित वर्षा व बर्फबारी तथा बढ़ते तापमान के रूप में दिख रहा है। मेरी सभी से अपील है कि हिमालय की रक्षा में अपना योगदान देने के लिए आगे आयें।’

आध्यात्मिक बौद्ध गुरु ने आगे कहा, ‘जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पहाड़ के लोगों की जीवन शैली और आय के स्रोतों पर साफ नजर आता है। हिमालयी पर्यटन में वृद्धि से उन्हें रोजगार मिला है, सडक़, वायु मार्ग, दूरसंचार व इंटरनेट के माध्यम से वे बाकी देशों से जुड़े हैं, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग, यातायात से उपजे वायु प्रदूषण, कूड़ा-कचरा, सीवेज और शोर आदि के बढऩे से उन्हें जीवन की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।’

बताया गया कि गर्मियों में धर्मशाला से लेह तक एक ऐतिहासिक पद यात्रा निकलेगी, जिसमें थाईलैंड के 200 से अधिक भिक्षुक विश्व शांति और पर्यावरण रक्षा का संदेश देने के लिए भाग लेंगे। इसके बाद महाबोधि लेह में ‘विश्व शांति एवं हिमालय की बौद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण ‘ पर तीन-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन होगा। इससे पूर्व, 21-23 जून को लेह में ही, ‘अहिंसा, महाकरुणा एवं ध्यान का विज्ञान ‘ विषय पर एक बड़ी कांफे्रंस होगी।

एमआईएमसी, लेह (लद्दाख) में स्थित एक गैर-लाभकारी एनजीओ है, जो हिमालयी क्षेत्र की मानवीय, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और पर्यावरणीय परियोजनाओं में रत है। संघसेना द्वारा 1986 में स्थापित, यह संगठन जरूरतमंद बच्चों के लिए उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और सुरक्षित आवास, रोगियों व असहाय लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा, महिलाओं व वंचित समूहों के लिए सशक्तिकरण और साक्षरता, तथा वृद्ध और निराश्रितों के लिए देखभाल प्रदान करता है।

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य महानुभावों में प्रमुख थे- मेजर दीपक चौधरी, कैप्टन आनंद, कर्नल विजय एस जामवाल, हाइड्रोलॉजिस्ट रितेश आर्या एवं एडवोकेट लोकेश जैन।

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